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प्रवकथन

मिथिला प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण प्रान्त है। इसकी लावण्यमयी मंजूल मूत्ति, मधूरिमा से भरं। हुई सरस वेला और उन्मादिनी भ बनायें किसके हृदय को नहीं यृदगुदा देतीं ? यहाँ के वसन्तकालीन सुहावने समय, बाँसों के कुरमूट में छिपी गिलहरियों क प्रेमालाप, सुरड्िजित सुन्दर पुष्प, सुचित्रित पशु-पक्षीी और कोमल पत्तियों के स्पन्दन अपने इंदं-गिर्द एक उत्सुकतापूर्ण …

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भूमिका

इस भाषा में मैथिल’ हिन्दू और मुसलमान, सब ने ग्रन्थ लिखा और यह साहित्य कम-से-कम छ: सौ वर्ष से विविध विषयों में पूर्ण हे। मुसलमानों ने मैथिली में मसिआ भी लछिखा—यथा : एहि दसो दिन सेयद बसवा कटोलके रे हाय हाय।से हो बसवा भेले बिसरनमा रे हाय हाय॥।एहि दसौ दिन सेयद लकड़ी चिरोलक रे हाय …

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