मेथिली लोकगीत (Maithili Lokgeet)

भूमिका ग्राम्य-साहित्य साहित्य का एक बहुत बड़ा अंग है। कोई भी साहित्य जीवित नहीं रह सकता हे जिसका मौलिक सम्बन्ध जन-स धारण से न हो। थोड़े से विद्वानों द्वारा कोई साहित्य अधिक दिन तक प्रफुल्लित, उन्नत _ ओर पल्‍लवित नहीं रह सकता हूँ। साहित्य के कुछ अंश तो ऐसे है जो राजाओं और धन-सम्पन्न सज्जनों …

मेथिली लोकगीत (Maithili Lokgeet) Read More »