Month: August 2020

प्रवकथन

मिथिला प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण प्रान्त है। इसकी लावण्यमयी मंजूल मूत्ति, मधूरिमा से भरं। हुई सरस वेला और उन्मादिनी भ बनायें किसके हृदय को नहीं यृदगुदा देतीं ? यहाँ के वसन्तकालीन सुहावने समय, बाँसों के कुरमूट में छिपी गिलहरियों क प्रेमालाप, सुरड्िजित सुन्दर पुष्प, सुचित्रित पशु-पक्षीी और कोमल पत्तियों के स्पन्दन अपने इंदं-गिर्द एक उत्सुकतापूर्ण …

प्रवकथन Read More »

भूमिका

इस भाषा में मैथिल’ हिन्दू और मुसलमान, सब ने ग्रन्थ लिखा और यह साहित्य कम-से-कम छ: सौ वर्ष से विविध विषयों में पूर्ण हे। मुसलमानों ने मैथिली में मसिआ भी लछिखा—यथा : एहि दसो दिन सेयद बसवा कटोलके रे हाय हाय।से हो बसवा भेले बिसरनमा रे हाय हाय॥।एहि दसौ दिन सेयद लकड़ी चिरोलक रे हाय …

भूमिका Read More »

मेथिली लोकगीत (Maithili Lokgeet)

भूमिका ग्राम्य-साहित्य साहित्य का एक बहुत बड़ा अंग है। कोई भी साहित्य जीवित नहीं रह सकता हे जिसका मौलिक सम्बन्ध जन-स धारण से न हो। थोड़े से विद्वानों द्वारा कोई साहित्य अधिक दिन तक प्रफुल्लित, उन्नत _ ओर पल्‍लवित नहीं रह सकता हूँ। साहित्य के कुछ अंश तो ऐसे है जो राजाओं और धन-सम्पन्न सज्जनों …

मेथिली लोकगीत (Maithili Lokgeet) Read More »

Scroll to Top